सोने में आई 15 साल की बड़ी गिरावट, चांदी भी टूटी, आगे कितना होगा सस्ता? Gold Price

By Meera Sharma

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Gold Price: वैश्विक बाजारों में इन दिनों एक अत्यंत दिलचस्प और विरोधाभासी स्थिति देखने को मिल रही है जो हर निवेशक और आम आदमी को हैरान कर रही है। एक तरफ जहाँ ईरान में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें जोरदार उछाल के साथ नए ऊँचाइयों की ओर बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सोना और चांदी जैसी कीमती धातुएँ जो आमतौर पर युद्ध और संकट के समय चमकती हैं, इस बार ऊपरी स्तरों से काफी नीचे आ गई हैं। यह स्थिति इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि पारंपरिक रूप से माना जाता है कि जब दुनिया में कोई बड़ा संकट आता है तो निवेशक सोने की ओर दौड़ते हैं और उसकी कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन इस बार बाजार का व्यवहार उस पुरानी धारणा को चुनौती दे रहा है।

सोने के लिए 15 साल का सबसे मुश्किल हफ्ता

हाल ही में बीता सप्ताह सोने के लिए पिछले डेढ़ दशक का सबसे बुरा और कठिन सप्ताह साबित हुआ है जिसमें इसकी कीमतों में एक सप्ताह में ही करीब साढ़े नौ प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरकर 4,574 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया और यह गिरावट वर्ष 2011 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। घरेलू बाजार में भी स्थिति कुछ अलग नहीं रही और एमसीएक्स पर सोने के भाव मार्च के शुरुआती दिनों में जहाँ डेढ़ लाख रुपये के पार कारोबार कर रहे थे, वहीं अब वे 1.45 लाख रुपये के नीचे आ गए हैं। यदि यह रुझान जारी रहा तो मार्च 2026 का महीना सोने के लिए वर्ष 2008 के बाद का सबसे खराब महीना बन सकता है।

चांदी भी लुढ़की

सोने की तरह चांदी भी इस समय भारी दबाव में है और उसकी स्थिति भी किसी से बेहतर नहीं कही जा सकती। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का भाव दो प्रतिशत से अधिक गिरकर 69.66 डॉलर के स्तर पर आ गया है जो दिसंबर के बाद का सबसे निचला स्तर है। पूरे सप्ताह में चांदी की कीमतों में 14 प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट देखी गई और यह लगातार तीसरा सप्ताह है जब चांदी के भाव में कमी आई है। घरेलू बाजार में भी एमसीएक्स पर चांदी 2.6 लाख रुपये के स्तर से गिरकर 2.3 लाख रुपये के नीचे आ गई है जिससे उन निवेशकों में निराशा है जो इसे एक मजबूत निवेश विकल्प मान रहे थे।

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गिरावट की असली वजह

बाजार के जानकारों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं जिनके संयुक्त प्रभाव से यह तेज गिरावट देखने को मिल रही है। सबसे पहली और प्रमुख वजह यह है कि वर्ष 2025 में सोने में 66 प्रतिशत और चांदी में 135 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी आई थी और इतनी बड़ी रैली के बाद एक स्वाभाविक और जरूरी सुधार की उम्मीद बाजार में पहले से ही थी। ईरान संघर्ष की शुरुआत में कुछ और तेजी आई लेकिन अब वह उत्साह ठंडा पड़ रहा है और कीमतें वापस सामान्य स्तर की ओर लौट रही हैं।

बड़े निवेशक बदल रहे हैं अपनी रणनीति

कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दुनिया के बड़े और संस्थागत निवेशक इस समय सोने और चांदी से अपनी पूँजी निकालकर अन्य परिसंपत्तियों में लगा रहे हैं जहाँ उन्हें अधिक आकर्षक रिटर्न मिलने की संभावना दिख रही है। जब बाजार में दूसरे निवेश विकल्प बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो निवेशकों का झुकाव स्वाभाविक रूप से उन विकल्पों की तरफ हो जाता है और सोने जैसी धातुओं से पैसा खिंचने लगता है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति ने भी सोने के निवेशकों को आक्रामक रुख अपनाने से रोका हुआ है। यही कारण है कि ईरान जंग जैसे बड़े भू-राजनीतिक संकट के बावजूद सोने-चांदी की कीमतें उस तरह नहीं बढ़ीं जैसा पहले होता था।

आगे क्या होगा

वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थानों और विश्लेषकों ने सोने और चांदी की दीर्घकालीन संभावनाओं को लेकर अभी भी सकारात्मक रुख बनाए रखा है। गोल्डमैन सैक्स ने वर्ष 2026 के अंत तक सोने का लक्ष्य करीब 5,400 डॉलर प्रति औंस आँका है जबकि जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि इस वर्ष में धीरे-धीरे सोना 5,000 डॉलर के पार जा सकता है। मैक्वेरी ग्रुप ने भी सोने के लिए 4,300 से 4,600 डॉलर और चांदी के लिए 62 से 75 डॉलर का दायरा बताया है। इन अनुमानों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है जो दर्शाता है कि अल्पकालीन गिरावट के बावजूद दीर्घकालीन दृष्टि सकारात्मक बनी हुई है।

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वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की चेतावनी और अवसर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि यदि ब्याज दरें ऊँची बनी रहीं तो अल्पकालीन स्तर पर सोने के भाव एक निश्चित दायरे में सिमटे रह सकते हैं या दबाव में रह सकते हैं। लेकिन यदि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और गहरी हो या भू-राजनीतिक संकट और तीव्र हो तो सोने की माँग में फिर से तेजी आ सकती है। इसका मतलब यह है कि जो निवेशक दीर्घकालीन नजरिये से सोचते हैं उनके लिए इस गिरावट का समय एक अनुकूल खरीद अवसर भी हो सकता है। हालाँकि यह निर्णय पूरी तरह से व्यक्तिगत जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है।

निवेशकों के लिए संदेश

इस पूरे उतार-चढ़ाव का सबसे बड़ा सबक यह है कि बाजार कभी भी एक सीधी रेखा में नहीं चलता और किसी भी बड़ी रैली के बाद सुधार स्वाभाविक होता है। जो निवेशक घबराहट में नुकसान में बेचते हैं वे अक्सर बाद में पछताते हैं क्योंकि बाजार अपनी दिशा वापस पाता है। सोने और चांदी का दीर्घकालीन रुझान अभी भी सकारात्मक माना जा रहा है और बड़े संस्थानों के अनुमान भी इसी बात की पुष्टि करते हैं। इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें और जल्दबाजी में किसी भी कदम से बचें।

Disclaimer

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 यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें उल्लिखित कीमतें, अनुमान और विशेषज्ञ राय सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों पर आधारित हैं और बाजार की स्थिति तेजी से बदलती रहती है। सोना, चांदी या कोई भी अन्य परिसंपत्ति में निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है और पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता। लेखक या प्रकाशक इस लेख के आधार पर किए गए किसी भी निवेश निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

Meera Sharma

Meera Sharma is a talented writer and editor at a top news portal, shining with her concise takes on government schemes, news, tech, and automobiles. Her engaging style and sharp insights make her a beloved voice in journalism.

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